प्यारी पृथ्वी

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बाबू लाल शर्मा©
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🌍 *प्यारी पृथ्वी*🌏
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प्यारी  पृथ्वी  जीवन दात्री,
सब  पिण्डों में, अनुपम है।
जल,वायु का  मिलन यहाँ,
पर अनुकूलन भी उत्तम है।🌕

सब जीवो को जन्माती है,
माँ   के जैसे पालन    भी।
मौसम  ऋतुएँ  वर्षा, जल,
का करती है संचालन भी।🌕

सागर हित जगह बनाती,
महा द्वीपों   में  बँटती  है।
पर्वत नदियां ताल तलैया,
सब के  संगत  लगती  है।🌕

मानव ने निजस्वार्थ सँजोये,
देश   प्रदेशों  बाँट  दिया  है।
पटरी  सड़के  पुल बाँधो से,
माँ  का  दामन  पाट  दिया।🌕

इससे आगे सुखसुविधा मे,
भवन, इमारत भारी  भारी।
कचरा  गन्द प्रदूषण बाधा,
घिर  गई  है  पृथ्वी प्यारी।🌕

पेड़ वनस्पति जंगली जंगल,
जीव  जन्तु जड़ दोहन कर।
प्राकृतिक सब छटा बिगाड़े,
मानव  ने   अन्धे   हो  कर।🌕

माँ धरती सहती विपुल भार,
निजतन पर धारण करती है।
अन,धन,जल,थल,जड़चेतन,
सबका सम् पालन करती है।🌕

प्यारी पृथ्वी का संरक्षण,
अपनी   जिम्मेदारी   हो।
विश्व सुमाता पृथ्वीरक्षण,
महती  सोच  हमारी  हो।🌕

माँ वसुधा सी अपनी माता,
दोनो   का   श्रृंगार न जाए।
आज नये संकल्प करें मनु,
माँ की क्षमता बढ़ती जाए।🌕

नाजायज पृथ्वी उत्पीड़न,
विपदाओं को आमंत्रण है।
धरती  माँ की  कदर  करें,
वरना तो प्रलय निमंत्रण है।🌕

पृथ्वी संग संतुलन छेड़ो,
कीमत  चुकनी है  भारी।
इतिहासो के पन्ने  पढ़लो,
आपद ने संस्कृति संहारी।🌕

प्यारी पृथ्वी प्यारी ही हो,
ऐसी  सोच  हमारी    हो।
सब जीवों से  सम रहना,
वसुधा माँ सम प्यारी हो।🌕

माँ तन से स्वच्छ,स्वस्थ हो,
मनु मन में क्या बीमारी हो।
मन से सोच बनाले  मानव,
तो कैसी,क्या लाचारी हो।🌕

माँ पृथ्वी प्राणों की दाता,
प्राणो  से   भी  प्यारी  है।
पृथ्वी प्यारी माँ भी प्यारी,
माँ   से   पृथ्वी  प्यारी  है।🌕

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सादर🙏🏻,
*बाबू लाल शर्मा*
सिकंदरा,दौसा©
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