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जल संरक्षण

भू जल एवं वर्षा जल पुनर्भरण  💧  *जल संरक्षण* 💧 .                 ----  बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञ _____________________________ .                *आत्म विचार* .                  ( लेखकीय ) जल ही जीवन है, जल से ही जीवन है। ब्रह्माण्ड में पृथ्वी ही एक मात्र पिण्ड है, जहाँ जल एवं वायु (प्राण वायु) उपलब्ध है। जल और वायु से जन जीवन,वन वनस्पति आदि संभव है। वैश्विक स्तर पर वर्तमान में, वन विनाश, खनिज दोहन, मानवीय भूलें, जल का अतिदोहन , ग्रीन हाउस इफेक्ट ,कंकरीट वन, कार्बन गैसों की वृद्धि, ओजोन परत का क्षरण, पृथ्वी का बढ़ता तापमान, हिम ध्रुव गलन, सागर जल वृद्धि आदि अनेक ऐसे कारण हैं, जिससे पृथ्वी पर वर्षा की असमानता और अनियमितता के साथ ही भूमिगत जल , भूजल की गिरावट ,कमी या अनुपल्बधता की समस्याएँ उत्पन्न हो गई है। .     कई देश प्रदेश क्षेत्र और हमारा राजस्थान तो आदिकाल से ही न्यून वर्षा से पीड़ित रहता आया है, भूजल की कमी और अकाल यहाँ क...

विज्ञ, लावणी छंद रस (बुक)

'विज्ञ, 'लावणी छंद रस' - पुस्तक प्रकाशन के लिए रचनाएँ  .                 " छन्द " छंद शब्द 'चद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है ' आह्लादित " , प्रसन्न होना। छंद की परिभाषा- 'वर्णों या मात्राओं की नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्लाद पैदा हो, तो उसे छंद कहते हैं'।  छंद का सर्वप्रथम उल्लेख 'ऋग्वेद' में मिलता है। 'छंद के अंग'- 1.चरण/ पद-,- छंद के प्रायः 4 भाग होते हैं। इनमें से प्रत्येक को 'चरण' कहते हैं। हिन्दी में कुछ छंद छः- छः पंक्तियों (दलों) में लिखे जाते हैं, ऐसे छंद दो छंद के योग से बनते हैं, जैसे- कुण्डलिया (दोहा + रोला), छप्पय (रोला + उल्लाला) आदि। चरण २ प्रकार के होते हैं- सम चरण और विषम चरण।  2.वर्ण और मात्रा - एक स्वर वाली ध्वनि को वर्ण कहते हैं, वर्ण= स्वर + व्यंजन  लघु १,  एवं गुरु २ मात्रा 3.संख्या और क्रम- वर्णों और मात्राओं की गणना को संख्या कहते हैं। लघु-गुरु के स्थान निर्धारण को क्रम कहते हैं। 4.गण - (केवल वर्णिक छंदों के मामले में लागू) गण का अर्थ है 'समूह'। यह समूह तीन वर्णों का होता है। ग...