जल संरक्षण
भू जल एवं वर्षा जल पुनर्भरण 💧 *जल संरक्षण* 💧 . ---- बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञ _____________________________ . *आत्म विचार* . ( लेखकीय ) जल ही जीवन है, जल से ही जीवन है। ब्रह्माण्ड में पृथ्वी ही एक मात्र पिण्ड है, जहाँ जल एवं वायु (प्राण वायु) उपलब्ध है। जल और वायु से जन जीवन,वन वनस्पति आदि संभव है। वैश्विक स्तर पर वर्तमान में, वन विनाश, खनिज दोहन, मानवीय भूलें, जल का अतिदोहन , ग्रीन हाउस इफेक्ट ,कंकरीट वन, कार्बन गैसों की वृद्धि, ओजोन परत का क्षरण, पृथ्वी का बढ़ता तापमान, हिम ध्रुव गलन, सागर जल वृद्धि आदि अनेक ऐसे कारण हैं, जिससे पृथ्वी पर वर्षा की असमानता और अनियमितता के साथ ही भूमिगत जल , भूजल की गिरावट ,कमी या अनुपल्बधता की समस्याएँ उत्पन्न हो गई है। . कई देश प्रदेश क्षेत्र और हमारा राजस्थान तो आदिकाल से ही न्यून वर्षा से पीड़ित रहता आया है, भूजल की कमी और अकाल यहाँ क...