जिन्दगी
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बाबू लाल शर्मा©
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**जिन्दगी* फिल्मी टाइटल सी
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*जिन्दगी ईश वरदान है।*
खुदा का ही,इक फरमान है।
मनु हम जिएं,यों बनके मनुज,
दिल में यही बस एक,अरमान है।
*जिन्दगी माँ का अरमान है,*
सृष्टि रचना में यह,अहसान है।
हो सेवाजतन,इसके खातिर,सखे,
इसको हम पर बड़ा,ही अभिमान है।
*जिन्दगी एक अहसान है,*
मानो रब का प्रिय,रहमान है।
पिता के लिए भी,जिएँ तो सही,
वे तो खुद ही इक,स्वाभिमान है।
*जिन्दगी जमाने की पहचान है,*
रिश्ते नातों की, यही कदरदान है।
मत बिसारो इसे यूँ, गुजारो नहीं,
सृष्टि कर्ता का यही,तो महादान है।
*जिन्दगी एक सफर है सुहाना,*
जिसने कदम बढ़ाए, उसने जाना।
जीवन तो"चलती का नाम है गाड़ी,"
चला,न,संघर्ष किये,रहता अनजाना।
*जिन्दगी प्यार का गीत है,*
जो जैसा गाए, वो संगीत है।
चाहे कैसा भी,मिले हम सफर,
जिन्दगी में जरूरी,इक मनमीत है।
*जिन्दगी की न टूटे लड़ी,*
कर्मो की,जोड़े कड़ी से कड़ी।
भाग्य की बातें तो , बातें रहीं,
कर्मो के मनकों की,लम्बी लड़ी।
*जिन्दगी इम्तिहान लेती है,*
हर कदम हमारी जान,लेती है।
जो महा मानव हुए, धरती पर,
उनका ही यह, बलिदान लेती है।
*जिन्दगी तो बेवफा है,*
जन्म लिया है,मरण खफा है।
अच्छे बुरे का वरण ही सफा है,
बफा की कसम,सभी बेबफा है।
*जीवन कोरे कागज जैसा* होता है,
रंगो की महफिल के,सपने बोता है।
किसको कैसे रंग मिलें,कर्म भूमि पर,
रंगो का ही व्यापार,यहाँ पर होता है।
*जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है,*
दिल ही जिन्दा रखले क्याआसान है
जीते तो सभी है,जीना जो पड़ता है,
जीएँ न मरे जो सखे,वही बद नाम है।
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✍©
बाबू लाल शर्मा"बौहरा"
सिकन्दरा,दौसा,राज.
9782924479
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