बाल मजदूर
[5/21, 8:33 AM] Babu Lal Sharma: . . *2nd*
. . *बाल मजदूर*
. (अर्थ,कारण,दशा व निवारण)
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राज,समाज,परायों अपनों के कर्मो के मारे
घर परिवार से हुये किनारे फिरते मारे मारे
पेट की आग बुझाने निकले देखो ये दीवाने
बाल मजदूर भ्रमित बेचारे हार हारकर हारे
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यह भाग्य दोष या कर्म लिखे की बात नहीं
यह विधना की हमको कोई नवसौगात नहीं
मानव के गत कृतकर्मो का फल बच्चे भुगते
इससे ज्यादा और शर्म... की कोई बात नही
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याया वर से कैदी से ये दीन हीन से पागल से
बालश्रमिक मेहनत करते दिखते हैं घायल से
पेट भरे न तन ढकता सच में क्या उपकारी है
खूनचूसने वाले इनके मालिक होते *तायल से
ये बेगाने से बेगारी से ये दासप्रथा अवशेषी है
इनको आवारा न बोलो जनगणमन संपोषी हैं
सत्सोचें सच मे ही क्या ये सच में सचदोषी है
या मानव की सोचों की सरे आम मद होंशी है
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जीने का हक दें देवें , रोटी कपड़े संग मुकाम
शिक्षासंग प्रशिक्षण फिर दिलवादें अच्छाकाम
आतंकी गुंडे जेलों मे जो खाते मौज मनाते हैं
कैदी-खातिर बंद करें,ये धन आए इनके काम
. (*तायल=गुस्सैल) . *******************
नाम:--बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
मोबाइल नं.9782924479
शहर/प्रदेश:-सिकंदरा,दौसा(राज.)
[5/21, 8:35 AM] Babu Lal Sharma: . . . *1st*
. . *बाल मजदूर*
👉(अर्थ)
जो विधना के घर से बिनाभाग्य केआजाते है
ऐसे बचपन भूख के मारे भूख कमाने जातेें है
जिसने बचपन नहीं देखा नही हाथ वे रेखा हैं
चन्दा उगना भी जिसनेआजतलक न देखा है
जो अपने व गैरों के गत कृत कर्मो मजबूर हैं
जो बच्चे मजबूर है...ये....वही बाल मजदूर है
👉(कारण)
परिवारटूट,लेते तलाक,लिविनशिपका जोर है
कुछ कारण घोर गरीबी के,महंगाई का शोर है
मजबूरी माँ.. बापों की मजदूरी इन्हें कराती है
कुछ हम भी दोषी..कुछ राजनीति भरमाती है
👉(दशा)
ईंट के भट्टे चेजे अड्डे व होटल-ढाबे बात सुनें
धनवानों के महलसँजोते वेही तो कालीन बुनें
कचरे के ढेरों मे देखो,जाने क्या क्या चुनते हैं
सेवा भार के बदले देखो ये क्या क्या सुनते हैं
धन बल की करे चाकरी,भिखमंगे से लगते हैं
रोटी- कपड़े की चिंता में भूखे नंगे से रहते हैं
👉(निवारण)
बालश्रमिक को खर्चा,शिक्षा संग प्रशिक्षण दो
धर्म,दलों के चंदे रोको इन बच्चों को रक्षण दो
इनकी खुशियां लौटाने दत्तक कर संरक्षण दो
जातिभेद भुलाके इनको जीने कोआरक्षण दो
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नाम:--बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
मो.नं.:--9782924479
शहर/प्रदेश:--सिकंदरा,दौसा(राज.)
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