नई साल...।
*कैसे कह दूँ नई साल है*
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जब किसान की खेती उजड़े,
अफसर माला माल है,
मजदूरों की दशा न बदले,
कैसे कहदूँ नई साल है।
न फसल पकी,न मौसम बदले,
धरती बड़ी बदहाल है,
बिन मौसम कोयल नहीं बोले,
कैसे कह दूँ नई साल है।
इतिहासों को बदल रहे ,
बालीवुड़ धन की चाल है,
हाय हलो गुडमोर्निंग छा रहे,
राम राम बे हाल है
लोकतंत्र का ढोल पीटते,
नेता नटवर लाल है,
जनता को सब तरह लूटते
कैसे कह दूँ नई साल है।
विगत समय मे क्या बदला है,
अब भी वही के वही हाल है,
मात्र कलेण्डर बदला है,फिर
कैसे कह दूँ नई साल है।
आप मनाओ नई साल को
अट्ठारह की नई साल है
हमको तो सर्दी खलती है
मित्रों हम तो बाबू लाल है।
सादर🙏🏻
बाबू लाल शर्मा
सिकन्दरा
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