माँ...माँ...मेरी..माँ..
🌾🌿🌾🌿🌾🌿🌾🌿🌾🌿
🌸 *माँ..माँ.. मेरी माँ...* 🌸
मात्सृष्टि ब्रह्मांड प्रकृति का,संचालन करती है
माँ धरा, जल थल,जड़ चेतन धारण करती है
इस सृष्टि का संतुलन,अपनी ही जिम्मेदारी है
विश्वमात् पृथ्वी संरक्षण,महती सोच हमारी है
मात भारती अमर रहे,बस इतना अरमान रहे
दुष्टजनों के आतंको से,मुक्त रहे माँ ध्यान रहे
मात् शारदे सबको वरदे,तमहर ज्योतिर्ग्यान दें
चले लेखनी जन हित मेरी,संस्कार, सम्मान दे
माँ जननी,दुखहरनी,तन प्राणों का सृजन करे
मातृ आँचल स्वर्ग सरीखा,कैसे गौरवगान करें
माँ के चरणों में जन्नत है, आशीषें है बोली में
माँ के हाथों रोटी अमृत,शक्ति कुंकुम रोली में
वसुधा को कागज माने,व सागर मसि पात्र हो
माँ के गुणगौरव लिख दूं,मेरी नहीं औकात वो
गौ माता है मात सरीखी,भारत में सनमानी है
युगों युगों से गौ महिमा,जनगणमन ने मानी है
माँ गंगा,माँ यमुना नर्मद, कावेरी सम सरिताएँ
माँ सम नदियां हैं ये,तृषित प्रदूषित न हो जाएँ
माँ के प्रति रूपों का हम,कैसे कर्ज चुकाएंगे
माँ के हितचित कर्म करें,सारे फर्ज निभाएंगे
---🌸🌸---
सादर🙏🏻©
बाबू लाल शर्मा,बौहरा
सिकंदरा,दौसा(राज.)
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
Comments
Post a Comment