हल्दीघाटीःएकलिंग दीवान....
18जून,हल्दीघाटी पर्व
पर सादर:-
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बाबू लाल शर्मा
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*हल्दीघाटी:*
*एकलिंग दीवान.....*
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मन करता है गीत लिखूं,
मैं एक लिंग दीवाने पर।
मातृभूमि की रक्षा करते,
आजादी के परवाने पर।।✍
चित्रांगद की बात लिखूं,
मौर्य वंश अवसान पर।
बापा रावल धाक् लिखूं,
चित्तौड़ सबै ,मेवाड़ पर।।✍
बप्पा रावल के वंश लिखूं ,
या मेवाड़ी अभिमान पर।
मोकल का यशगान लिखूं ,
या, चित्तौड़ी अरमान पर।।✍
कुम्भा के अभियान लिखूं,
या,चाचा,मेरा की नादानी।
विजयस्तंभ के गौरव लिखूं,
या फिर ऊदा की हैवानी।।✍
खिलजी,धोखे बाज लिखूं,
गोरा बादल की बात करूं।
रतन सिंह सन घात लिखूं,
पद्मावति जौहर बात करूं।।✍
सांगा के अस्सीे घाव लिखूं,
या, युद्धों के घमासान पर।
मीरा की हरि प्रीत लिखूं,
मैं वृन्दावन भगवान पर।।✍
बनवीरी षड़यंत्र लिखूं,
या चंदन के बलिदान को।
उदयसिंह का जीवन लिखूं,
या पन्ना के दीपकदान को।।✍
हुमायू,राखी-भूल लिखूं ,
या कर्मवती सम्मान पर।
मन करता है गीत लिखूं ,
मैं एक लिंग दीवान पर।।✍
कुंभलगढ़ की भींत लिखूं,
या उदय सिंह संघर्ष पर।
शहंशाही तमन्ना लिखूं,
या नवरत्नों के उत्कर्ष पर।।✍
जयमल पत्ता युद्ध लिखूं ,
या मुगलों के अय्यारों पर।
वचन बद्ध घर से निकले,
उन चित्तौड़ी लौहारों पर।।✍
राणा संग शक्तिसिंह लिखूं,
या उस मेवाड़ी हाल पर।
मान सिंह अवसादी लिखूं,
मैं पीछोला की पाल़ पर।।✍
अकबरी समझौती लिखूं,
या आड़ावल आन पर।
ठकुर सुहाती कैसे लिखूं,
वेष मुगलिया मान पर।।✍
मन करता है गीत लिखूं,
मैं एक लिंग दीवाने पर।
महा राणा प्रताप लिखूं,
या, चेतक परवाने पर।।✍
अकबर से टकराव लिखूं ,
या मान सिंह अपघात पर।
वन वन भटकी रात लिखूं ,
या घास की रोटी भात पर।।✍
पीथल पाथल घटना लिखूं ,
अकबर की मन हार पर।
पीथल की हुशियारी लिखूं,
या बीकाणै अभि मान पर।।✍
मन करता है गीत लिखूं,
मै एक लिंग दीवाने पर।
हल्दी घाटी समर लिखूं,
आजादी के परवाने पर।।✍
जय, एकलिंग उद्घोष लिखूं,
पूँजा ,के बल की आन को।
राणा,चेतक का शौर्य लिखूं,
भगते,छुपते मुगल,मान को।।✍
हाथी हौदाई मान लिखूं ,
या चेतक रण मस्ताने पर।
राणा का चूका भाल लिखूं,
या, मान सिंह नादाने पर।।✍
बदाँयूनी बद हाल लिखूं,
आसफखाँ हतभाग्य को।
भू, मेवाड़,सुभागी लिखूं,
मान,मुगल दुर्भाग्य को।।✍
चेतक राणा घायल लिखूं,
या, मन्नाजी बलिदाने पर।
मन करता है गीत लिखूं,
मै एक लिंग दीवाने पर।।✍
चेतक का तन त्याग लिखूं,
स्वामी , मेवाड़ी आन पर।
शक्ति सिंह का मेल लिखूं,
छः,नयन अश्रु अवसान पर।।✍
प्रताप के शक्ति साथ लिखूं,
या,शक्ति के बल प्रताप को।
रक्त तलाई , लाल लिखूं,
या,चेतक प्रताप संताप को।।✍
भामाशाह की सम्पद लिखूं,
जो दी राणा की शान पर।
मन करता है गीत लिखूं,
मैं एक लिंग दीवान पर।।✍
चावण्ड या गोगुन्दा लिखूं,
या मँगरा मँगरा छापों पर।
महा राणा की यादें लिखूं,
मँगरों पर चेतक टापों पर।।✍
भीलों का सह भाग लिखूं,
मुगलों पर किए प्रहारों पर।
हाकिमखाँ सूरी तोप लिखूं,
या उन तोपों की मारों पर।।✍
अकबरी शान की हार लिखूं,
या मान सिंह की मात को।
मेवाड़ी पाग की जीत लिखूं,
शान-ए-मुगल आघात को।।✍
मुगले आजम में कैसे लिखूं,
इस,चंदनरज़,हल्दीघाटी को।
मेवाड़ी रक्त को नमन लिखूं,
दुत्कार मुगल परिपाटी को।।✍
राणै का अभिमान लिखूं,
या चेतक के सम्मान पर।
हल्दी घाटी तीरथ लिखूं,
हर आड़ावल चट्टान पर।।✍
मन करता है गीत लिखूं,
मैं एक लिंग दीवाने पर।
धरा धर्म की रक्षा करते,
आजादी के परवाने पर।।✍
क्या छोड़ूं क्या सोचूं लिखूं,
क्या,भूलूं क्या, याद करूं।
मेवाड़ धरा को नमन् लिखूं,
चेतक का गौरव याद करूं।।✍
मन करता है गीत लिखूं,
मैं महा राणा प्रताप पर।
एक बार मैं शीश झुका दूं,
चेतक की हर टाप पर।।✍
बार बार महा राणा लिखूं,
चेतक के हर रणवार पर।
लिखते लिखते खूब लिखूं,
मैं चेतक और असवार पर।।✍
अमर धाम हल्दी घाटी है,
अमर कथा उन वीरों की।
चेतक संग सवार अमर है,
अमर कथा रण धीरों की।।👌
मन करता है लिखते जाऊं,
महा राणा की आन पर।
हिन्दुस्तानी वीर शिरोमणि,
राणा , चेतक सम्मान पर।।✍
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✍सादर,
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
वरिष्ठ अध्यापक
सिकन्दरा,दौसा(राज.)
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