नमन् करूँ...
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*......नमन करूँ*
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जो पद,धनबल के कायल है,
उन हित क्यों मैं जतन करूँ।
शोषण के साधक है वे सब,
उनको क्यों कर नमन् करूँ।
गाँठ गठान हथेली में हो,
उन हाथों का जतन् करूँ।
जिनके पैरों छाले पड़ते,
उनके चरणों नमन करूँ🙏🏻
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वे जो श्रम के सत्साधक है,
कुल जिनके श्रमचोर नहीं।
तन के मोह में वतन भुलादें,
इतने जो कमजोर नहीं।
स्वेद बिन्दु से देश को सींचे,
उन्हे सलामे-वतन करूँ।
जिनके पैरों फटे बिवाई,
उनके चरणो नमन करूँ🙏🏻
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सीमा पर जो शीश कटाते,
वे सच्चे अवतारी है।
उनके हर परिजन के हम,
सब सच्चे दिल आभारी हैं।
जिनके रहते,वतन सुरक्षित,
उन बेटों को नमन करूँ।
जिनके पैर ठिठुरते जलते,
उनके चरणों नमन करूँ🙏🏻
🙏🏻
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शिक्षा के जो दीप जलाकर,
तम को दूर भगाने निकले।
सत्साहित् का सृजन करे,
जो नूतनदेश बनाने निकले।
देशप्रेम की आग के लेखक,
जन शिक्षक पदनमन् करूँ।
जन गण मन की पीड़ा गाते,
उनके चरणो नमन करूँ🙏🏻
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सर्दातप को सहा जिन्हौने,
देश के खातिर अन्न दिया।
तन का रूपरंग सब खोया
नंग बदन भू पूत जिया।
पिचके पेट के उन दीवाने,
धीरकृषक को नमन करूँ।
जिनके पैरों छाले पड़ते,
उनके चरणों नमन करूँ🙏🏻
🙏🏻
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जिनके लहू से देश बना है,
उनके ढंग का वरण करूँ।
देश को गिरवी रखने वाले,
बगुला पंथ का शमन् करूँ।
मेरे रक्त से संभव हो तो,
मुरझे चेहरेे चमन करूँ।
जिनके पैरों छाले पड़ते,
उनके चरणों नमन् करूँ🙏🏻
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सादर🙏🏻✍
बाबू लाल शर्मा"बौहरा"
सिकंदरा,दौसा,(राज.)
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