बाल विवाहःआखातीज

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बाल विवाह

*शादी*
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ढूंढाड़ी क्षेत्रीय परम्परा
व भाषा मे बाल विवाह
न करने की प्रेरणा देने
वाली रचना
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आइ रे आइ रे आखातीज
लाडू पुड़ी मिठाई... चीज
टाबर ब्याह का बुवगा बीज
आइ रे आइ रे आखा तीज

कैवे बाप अपणै टाबर नै
बेटा चाल ढोकबा मंदर मै
चँवरी टैन्ट व्यवस्था भारी
बेटा फेरा खाबा की है बारी

टाबर उठकर मुँह खोल्यो
अपणै बापू सू यूँ बोल्यो
बापू भूख नहीं अब मोकूँ
थोड़ो पानी पिलवा द् यो
अर फेरा तुम ही खाल्यो
मोकू सो ले बा द् यो।

मोकू आवै गहरी नींद
कोनी बणूँ मै अब बींद
टाबर जाण्यो आखातीज
बापू ल्यायो खाबा चीज
वो उठ र मूंडो धो लियो
पूरो पतो पड्यो जद बोल्यो

बापू म्हानै पढबा दै
चोखो मिनख बण बा दै
थारा किंया हिया की फूटी
बचपन क्यूँ बांधै तू खूंटी

देख ऊ कान्या मान्या नै
मगन्या अर छगन्या नै
वै आपरै करमा नै रोवै
जमारो बिरथा ही खोवै

टाबर पणै ब्याह की रीत
बापू मत कर ऐड़ी प्रीत
करदै पढबा की तजबीज
आइ रे आइ रे आखातीज
✍✍✍
©

सादर,🙏🏻
बाबू लाल शर्मा
सिकन्दरा,दौसा
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