हथियार उठाने बाकी है
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"""'''''''"""""बाबूलालशर्मा
*हथियार उठाने बाकी है*
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ऐ वक्त जरा थम कर चल,
कुछ फर्ज निभाने बाकी है।
बेटी जन्म अभिशाप बना,
ये दाग तो धोने बाकी है।🙋🏻
जन को समझना शेष अभी,
शासन को समझना बाकी है।
ऐ वक्त जरा थम कर चल,
कुछ फर्ज निभाने बाकी है।🙋🏻
हर कुल में जन्मी बेटी को,
उनका अधिकार दिलाना है।
इस जग में कैसे जीना है,
बेटी को सिखाना बाकी है।🙋🏻
नारी का चेतना शेष अभी,
जनमत का चेतना बाकी है।
सरकार बने हर बात मूक
उसको भी जगाना बाकी है।🙋🏻
ऐ वक्त जरा....
निर्मल तन मन बेटी हित,
उन कपटी दम्भी दुष्टों को।
पाबन्दी करना शेष अभी,
कुछ सजा दिलाना बाकी हैं।🙋🏻
खुले विचरते हिंसक,जंगली,
इन जरख,सियार,दरिन्दों को।
औकात बताना शेष अभी,
प्रतिघात लगाने बाकी है।🙋🏻
ऐ वक्त..........
इस जग के गोरख धन्धों से,
बिटिया की सुरक्षा शेष अभी।
कुछ मुझे सीखना शेष अभी,
औरों को सिखाना बाकी है।🙋🏻
बिटिया के हाथ मजबूत करे,
उन्हे निडर बनाना शेष अभी,
काली ,दुर्गा,झाँसी.....जैसे,
हथियार उठाने बाकी है।🙋🏻🙋🏻
ऐ वक्त......
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सादर,✍
बाबू लाल शर्मा
सिकंदरा,दौसा
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