खामोशी

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"""""""""""""""""बाबूलालशर्मा
👍 *खामोशी*👌

भगत सिंह तो हों घर घर में,
निज पुत्र के नाम पर खामोशी।

शेखर,सुभाष ऊधमसिंह भी हो,
अपनो के नाम फिर खमोशी।

क्रांति स्वरों से धरा गुँजा दे,
परिजन के नाम पर खामोशी।

सरकारों की नींद उड़ा दे,
निज हित के नाम पर खामोशी।

संसद पर भी बम फोड़ दे,
मित,सुत के नाम पर खामोशी।

चाहे फाँसी के फंदे से झूले,
निज,सुत के नाम पर खामोशी।

देश धरा पर कुरबानी दे,
परिवार के नाम पर खामोशी।

आतंकी से लड़़ शहीद हो,
सुत,भ्रात के नाम पर खामोशी।

अपराधी का खून पी जाए,
स्व जाति के नाम पर खामोशी।

दुष्कर्मी का गला घोंट दें,
निज धर्म के नाम पर खामोशी।

चोर,डकैतों से भिड़ जाए,
बगले झाँके फिर खामोशी।

इन शीशपटल,कवि धंधों से,
       घर घर में छा रही खामोशी।

संचालक के दौरे हो तब,
       शीशपटल पर खामोशी।

छुट भैये गलती पर गलती भुगते,
     पर बड़ो की गलती,खामोशी।

बहु की गलती पर झगड़े होते,
बिटिया की गलती , खामोशी।

सास बहु के घर के झगड़े,
       बेटे को रखनी खामोशी।

जब भ्रष्टाचार की बात चले,
     खुद का हित हो तो खामोशी।

आरक्षण की चर्चा करने पर
      खुद के हित फिर खामोशी।

जाति धर्म के झगड़े जब होते,
        सरकार में रहती खामोशी।

यह खामोशी अवसरवादी,
        अवसर आते ही खामोशी।

🐱🐱🐱🐱

सादर ✍©
बाबू लाल शर्मा,बौहरा
सिकंदरा,दौसा(राज.)
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