बेशर्म
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"""""""""""""""बाबूलालशर्मा
सायली विधान
🤷♀ *बेशर्म* 🤷♀
बेशर्म
कपूत औलाद
माँ बाप लज्जित
रह जाते
निपूते।🤷♀
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लजाया
दूध वंश
धर्म संस्कृति समाज
जिन्दा क्यों
कुकर्मी।🤷♀
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जीवन
कलंकित कर
जीने से बेहतर
मर जाते
भेड़िये।🤷♀
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भेड़िये
शर्मिंदा होते
मानवी करतूत सुन
शहर गाँव
जंगली।🤷♀
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नालायक
नराधम नपुंसक
बन रहे दुष्कर्मी
कापुरुष स्त्रैण
नरपिशाच।🤷♀
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सुनकर
मर्मान्तक घटना
बेटियां लुटती मरती
आहत होती
धरती।🤷♀
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अब
कैसे करें
बिटिया का संरक्षण
माता पिता
सोचें।🤷♀
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भेड़िये
होवें तो
पकड़ वन भेजें
दरिंदे दिखते
मानव।🤷♀
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कानून
अन्धा होता
बच जाते मुजरिम
छल कपट
कर।🤷♀
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समाज
चेतना लाए
दण्ड दुष्कर्मी को
देना होगा
कठोर।🤷♀
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बिटिया
मजबूत बनो
करो स्वयं संघर्ष
कृष्ण नहीं
आएंगे।🤷♀
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बनालो
सुदर्शन चक्र
हर घर बेटियां
बचानी होगी
आबरू।🤷♀
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प्रश्न
मस्तिष्क में
कौन बेटी लुटी
उत्तर मिले
गरीब।🤷♀
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साँवरे
देखकर दिखाओ
अन्धी सरकारों को
बेआबरू होती
बेटियां।🤷♀
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खामोश
शासन सरकार
सुरक्षित खुद रहते
नारी पीड़ा
असहनीय।🤷♀
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✍©
--बाबू लाल शर्मा,बौहरा,सिकंदरा
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