पिता
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""""''''''''''''''""""""बाबूलालशर्मा
🌹 *पिता* 🌹
जो तन क्षार-क्षार कर ले,
पिता,भगवन् सा होता है।
पुत्र हित प्राण जो तज दे,
पिता,दशरथ सा होता है।
पिता के भाव जब जागे,
हरेक हद पार कर जाता।
न देखे रात,बाढ़ ,नदिया,
पिता,वसु देव बन जाता।
पुत्र प्रेम की अग्निपरीक्षा,
पिता,लड़ काल से जाता।
पुत्र की मत्यु भ्रम छल मे,
पिता,गुरुद्रोण कट जाता।
वज्र सम् पीठ अरु काँधे,
जन्मभर श्रम सिखाते है।
जलालत संतति की देखे,
दमखमे दिल टूट जाते है।
ममता,महिमा, सत,समता,
त्याग, धैर्य,माँ की सौगातें।
शक्ति,बिन्दी,मेंहदी,कजरा,
सतत स्रोत पिता को पाते।
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सादर✍""""©
*बाबू लाल शर्मा* बौहरा
सिकंदरा--दौसा
दौसा(राजस्थान)9782924479
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पितु चरणों में सादर 🙏
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