मै..जिन्दा हूँ
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""""""""""""बाबूलालशर्मा
🌹 *मै जिन्दा हूँ*🌹
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सितारे साथ होते तो
सोचो क्या दिशा होती
सभी विपरीत ग्रह बैठे
मगर मै फिर भी जिन्दा हूँ।🙏
पटका आसमां से हूँ
जमीं ने मुझको झेला है
मिली है जो रियासत भी
नहीं,खुद से शर्मिन्दा हूँ।🙏
न भाई बहन मिलते है
न सगे सम्बन्धी मेरे तो
न पुख्ता नीड़ बन पाया
मै, बेघर ही परिन्दा हूँ।🙏
किया जाने कभी क्या
कोई सद कर्म मैने भी
हवा विपरीत मे भी तो
मै सरकारी करिंदा हूँ।🙏
मेरे न ठाठ ऊँचे है
न मेरी राह टेढी है
न धन का दास हूं
मै,गुर्बत का चुनिंदा हूँ।🙏
सभी तो रुष्ट हैं मुझसे
मै राजी किसे रखता
सभी सज्जन हैं प्यारे
मै, दुष्टों हित दरिंदा हूँ।🙏
न बातों में सियासत है
न सीखी ही नफासत है
न तन मन में नजाकत है
गँवई,गांवों का वशिन्दा हूँ।🙏
नहीं विद्वान भाषा का
न परिभाषा ही पहचानूं
बड़े अरमान न सींचे
न संस्कारी पुलिन्दा हूँ।🙏
सभी कमियां बतादी है
मगर एक बात है मुझमें
मै जैसा भी जहां भी हूँ
मैं,भारत का रहिन्दा हूँ।🙏
अपने देश की माटी
ये बलिदानी परिपाटी
का बेटा मैं जाइन्दा हूँ
इसलिए मैं, जिन्दा हूँ।🙏
मरे ये देश के दुश्मन
अपने भी पराये भी
वतन पर घात जो करते
उन्ही की लोक निन्दा हूँ।🙏
मुझे न जाति से मतलब
न मजहब से किनारा है
पंथ विश्वास से हटकर
मैं, ही बैराग्यी- बंदा हूँ।🙏
वतन है जान से प्यारा
हिफाजत की तमन्ना हूँ
करे जो देश से धोखा
उन्हे,फाँसी का फंदा हूँ।🙏
न समझे कोई भी शत्रु
देश को तोड़ देने की
वतन मजबूत है मेरा
नुमाइंदा मै,जिन्दा हूँ।🙏
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सादर🙏
बाबू लाल शर्मा
सिकंदरा,दौसा
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