पालीथिन कचरा
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"""""''""""""""'बाबूलालशर्मा
🏉 *पालीथिन कचरा* 🏉
मनुज नित नव विकास कर,
मानवता का बोध हो पहले।
कचरा नित बढ़ता है भू पर,
इसपर थोड़ा सोच भी करले।
नहीं तो देखेंगे दिन में सितारे,
कचरे के धरा पर वारे न्यारे।
🏉🏉
गौ माता अपनी माता है,
कहना सबको आता है।
आवारा सड़को पर डोले,
कचरा पालीथीन टटोले।
तो,माता के पूतों क्यों हारे,
कचरे के धरापर वारे न्यारे।
🏉🏉
भारत माँ धरती माँ कहते,
पर कैसे अपमान ये सहते।
सर्वत्र व्याप्त प्रेतों के जैसे,
पालीथिन के कचरे ये रहते।
कैसे सुधरें दिन मान हमारे,
कचरे के धरा पर वारे न्यारे।
🏉🏉
पशुधन खा बे मौत ही मरते,
कुवे खेत पालीथिन से भरते।
नाली रुकी पनपते मच्छर,
ताव बुखार प्रिय जन जलते।
हम अपनी आदत सन हारे,
कचरे के धरा पर वारे न्यारे।
🏉🏉
कहीं बाढ़ का कारक बनती,
पालीथिन जनधन को हरती।
खेत गऊ पशु बाँझ हो रहे,
तब भी चिल्ली थैली चलती।
क्यूँ मरते पशु पक्षी बिचारे,
कचरे के धरा पर वारे न्यारे।
🏉🏉
खुद बदलो तो दुनिया सारी,
बची रहे माँ,गौ,धरा हमारी।
पालीथिन पर रोक लगालो,
बस इतनी सी विनय हमारी।
क्यों लगते हो स्वयं किनारे,
कचरे के धरा पर वारे न्यारे।
🏉🏉
पालीथिन के भारी लफड़े,
थैले झोले सिल लो कपड़े।
राज की बात,राज ही रखते,
स्वास्थ्यपरक चलाऊ तगड़े।
अपनी किस्मत खुदमत हारे,
कचरे के धरा पर वारे न्यारे।
🏉🏉
🙏✍©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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""""'''"''''"स्वच्छता"""""""""""
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