राष्ट्रप्रेम की हाला

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प्रतियोगिता हेतु
मेरी रचना:---
"""''''"""""""'''''"""""""""""""""
शीर्षक:-- *राष्ट्रप्रेम* की हाला
विधा :---    कविता मुक्तछंद
विषय :-----राष्ट्रप्रेम
दिनांक:----05.08.2018

🌼🌼🌼🌼🌼🌼
""""""""""""""""""बाबूलालशर्मा
.🌼 *राष्ट्रप्रेम* की हाला 🌼
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भारत का मै मूल मनुज हूँ,
मै राम कृष्ण मैं भरत वही।
मैने  ही वेद रचे इस भू पर,
और रचे महा काव्य  मही।

राष्ट्र धरा का रक्षण करता,
मैं परवाना पंछी मतवाला।
वतन  परस्ती करता  हूँ मैं,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।🌼

युगों युगों  से  भारत  का,
मैने  स्वाभिमान रखा  है।
मैने भले  हलाहल  पीया,
पर शत्रु ने स्वाद चखा है।

मै पुरू, महा सिकंदर का,
मानस तुरत बदल डाला।
अड़िग रहा मैं देश प्रेम में,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।🌼

मै चाणक्य  चन्द्र दोनो ही,
अखंड  राष्ट्र विधान दिया।
सैल्यूकस से  डोला लेकर,
एक बड़ा अरमान  जिया।

अर्थशास्त्र  ने नवाचार की,
खोली  थी  नव मधुशाला।
जनता ने ली  थी अंगड़ाई,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।🌼

पृथ्वीराज, बरदाई चन्द्र भी,
मैं ही हमीर हठीला भी था।
रतन सिंह गोरा बादल और,
पद्मनि का जौहर मै ही था।

गुरु तेग बहादुर बन बेटों को,
दीवार में जिंदे चिनवा डाला।
देश धरम पर  प्राण  दे  दिए,
पी कर  राष्ट्र प्रेम की हाला।।🌼

मैं  ही राणा प्रताप हुआ तो,
हार  न मानी थी  मुगलों से।
पूरा  भारत  नत मस्तक था,
मैं वन  भटका दूर हुजूरो से,

हल्दीघाटी में मुगलमान का,
मानस मर्दन  करता  भाला।
आनबान और शान निभाई,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।।🌼

आर्यभट्ट चरक मैं वाल्मीकि,
माघ कवि  काली दास बना।
तुलसी सूर रसखान कबीरा,
नानक   मीरा   रैदास  बना।

बुद्ध और महावीर बन गया,
जगत गुरू सम्मानित वाला।
राष्ट्र धर्म  सब जन उजियारे,
पी कर राष्ट्र प्रेम  की  हाला।🌼

झाँसी रानी  व ताँत्या  टोपे,
मंगल पाण्डे सा  वीर हुआ।
आजादी  व मातृ भूमि हित,
कविजन शिक्षक धीर हुआ।

भगत सिंह आजाद बना मैं,
तन नाम देश के कर डाला।
गोली खाई  फाँसी चढ़ गए,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।।🌼

सैनिक कृषक मजदूर सभी,
मैं भारतभू भाग्य विधाता हूँ।
मैं वही मनुज हूँ भारतभू का,
कर्ण-दधीचि सा ही दाता हूँ।

मैने निज तनमनधन जीवन,
दे दिये वतन की मधु शाला।
जन्मों तक बलिदान करूँ मैं,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।।🌼

मैं ही बापू हूँ सत्य अहिंसा,
नेहरू  पंच शील  निर्माता।
लौहपुरुष,शास्त्री,इंदिरा,भी,
देशका मैं ही भाग्यविधाता।

अम्बेडकर बन मैने ही नव,
संविधान रचित कर डाला।
सदा देश का चिंतन करता,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।।🌼

सागर मथ कर पुल बाँधे है,
नदियों पर पुल बाँध बनाए।
नहर निकाल, सुरंग बनादी,
पर्वत काट पथ मार्ग बनाए।

पानी बाँध लाए मरु भू पर,
वृक्ष लगा  किया हरियाला।
सर्व विकास किया देश का,
पी कर  राष्ट्रप्रेम  की हाला।🌼

तुम सब आओ मेरे संग में,
राष्ट्रप्रेम के मिलन विरह में।
सबसे बढ़कर वतन प्रिय है,
मैंने जाना कठिन जिरह में।

मिलकर राष्ट्र बड़ा रखना है,
बनकर राष्ट्र प्रेम रख वाला।
जीवन मृत्यु  सर्व  समर्पित,
पी कर राष्ट्र प्रेम की हाला।।🌼
🌼🌼
✍©रचनाकार
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
वरिष्ठ अध्यापक
नि. सिकन्दरा 303326
दौसा,राजस्थान 9782924479
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"""''''''""राष्ट्र प्रेम""""""'"""""""
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मौलिक रचना अप्रकाशित
"""""बाबू लाल शर्मा
9782924479

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