पुरुष
.👀👀👀👀👀👀👀👀👀👀
~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
. 🌼 *पुरुष* 🌼
. दोहा-इक्कीसी
1.💫💫💫
मनु सतरूपा सृष्टि के,आदि पुरुषअरु नार।
आदम हव्वा भी कहे, मनु जीवन आधार।।
2..💫💫💫
पुरुष नार दोनो हुवै ,गाड़ी के दुइ चाक।
कौन बड़ा छोटा कहें, सोचें रहें अवाक।।
3..💫💫💫
नारी की महिमा अमित,कहते विविध प्रकार।
पुरुष वर्ग की बात भी, करलें हम दो चार।।
4..💫💫💫
बीज मंत्र है सृष्टि का, साहस का प्रतिरूप।
जैसे परुष कठोरता, पुरुष सनातन रूप।।
5..💫💫💫
सीना परुष शरीर है,मृदुता के मन भाव।
वाणी में भी परुषता,तन मन अमित प्रभाव।।
6..💫💫💫
पुरुष परुष प्रतिरूप है,श्रम ताकतअधिकार।
सबके हित जीवे मरे , प्रण पाले परिवार।।
7..💫💫💫
पुरुष नारि का पूत है, हर नारी का बाप।
नारी का पति पुरुष है,नर शिवशंकर आप।।
8..💫💫💫
पुरुष देह मे प्रीत है, नारी के प्रति मोह।
मनो आसक्ति नारि सन ,आकर्षण सम्मोह।।
9..💫💫💫
नारी के तन मन हिते ,पुरुष करे पुरषार्थ।
रचना सूत्र निभाय के,काम मोक्ष धरमार्थ।।
10..💫💫💫
कौन कहे सुन्दर नहीं, पुरुष देह असमान।
तन नाजुकता त्याग नर,बल साहसअनुमानि।
11..💫💫💫
शासन सत्ता में रहे, सदा पुरुष बढ़ि चाल।
युद्ध वीरता श्रम यथा,लिखे पुरुष के भाल।।
12..💫💫💫
नारी अत्याचार मद ,कुछ झूठे कुछ साँच।
सत द्रोही कापुरुष हैं, झूँठे द्रोह न आँच।।
13..💫💫💫
सबके हित में जीतता,सबके हित में हार।
जीवन भर सतकार है,नर से मानित नार।।
14..💫💫💫
पत्नी के सम्मान हित, पति दे प्राण गँवाय।
मात सुता के नाम की,गाली सह नहि पाय।।
15..💫💫💫
बिटिया के शुभ ब्याह में,लुटते पिता करोड़।
बेटे हित काटे उदर, रखता धन को जोड़।।
16..💫💫💫
माता के सम्मान को, कटा देत जो शीश।
धरती की रक्षा करे, तभी कहें जगदीश।।
17..💫💫💫
पुरुष नारि है चाहता ,चाहे नहीं बैकुण्ठ।
घात गरल पीता रहे, शिव सम नीलाकण्ठ।।
18..💫💫💫
पिता धर्म के लिए भी, जूझे पूत सपूत।
माता पितृ नकारते, कापुरुषत्व कपूत।।
19..💫💫💫
कापुरुषों को दण्ड दें, धोते पुरुष कलंक।
पौरुष कलंकित न रहे, रहलें सभी निसंक।।
20..💫💫💫
धीरज सागर सा रहे, बादल जैसे भाव।
पुरुष परुष वाणी भले, सूरज जैसे ताव।।
21..💫💫💫
नारि पुरुष में श्रेष्ठ का, पार न पावे ईश।
शरमा बाबू लाल दुइ, नर-नारी इक्कीस।।
💫💫💫💫💫💫
✍🙏©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकन्दरा,दौसा,(राज.)
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
Comments
Post a Comment