लावणी छंद :- पर्यावरण
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~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
.🌼 *लावणी छंद* 🌼
(शिल्प:-16+14=30 ,
दो दो चरणों में समतुकांत,
चरणांत में लघु,दीर्घ मात्रा
का बंधन नहीं होता)
🌾🌾 *पर्यावरण* 🌾🌾
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शस्य श्यामला इस धरती को,
आओ मिलकर नमन करें।
पेड़ लगाकर उनको सींचे,
वसुधा आँगन चमन करें।
स्वच्छ जलाशय रहे हमारे,
अति दोहन से बचना है।
पर्यावरणन शुद्ध रखें हम,
मुक्त प्रदूषण रखना है।
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ओजोन परत में छिद्र बढ़ा,
उसका भी उपचार करें।
कार्बन गैस की बढ़ी मात्रा,
ईंधन कम संचार करे।
प्राणवायु भरपूर मिले यदि,
कदम कदम पर पौधे हो।
पर्यावरण प्रदूषण रोकें,
वे वैज्ञानिक खोजें हो।
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तरुवर पालें पूत सरीखा,
सिर के बदले पेड़ बचे।
पेड़ हमे जीवन देते है,
मानव-प्राकृत नेह बचे।
गउ बचे संग पशुधन सारा,
. चिड़िया,मोर पपीहे भी।
वन्य वनज,जलज जीव सब,
सर्प सरीसृप गोहें भी।
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धरा संतुलन बना रहे ये,
कंकरीट वन कम कर दो।
धरती का शृंगार करो सब,
तरु वन वनज अभय वर दो।
पर्यावरण सुरक्षा से हम,
नव जीवन पा सकते हैं।
जीव जगत सबका हित साधें,
नेह गीत गा सकते हैं।
. 🌳🌳
✍🙏©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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