गणतंत्र
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~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
. 🇮🇳 *गणतंत्र* 🇮🇳
. (लावणी छंद)
भारत मेरा देश निराला,
बच्चा बच्चा मतवाला।
बार बार चोर लुटेरों ने,
डाका इस भू पर डाला।
आ कर लूटा वे रुके चले,
कुछ वंशो ने डेरा डाला।
रही कसर में ईस्ट इंडिया,
राज फिरंगी स्वार्थ वाला।
दो सौ साल जमाया कब्जा,
तानाशाही ताकत थी।
सारा धन इंग्लैंड ले गये,
जो भारत की दौलत थी।
सन सत्तावन का वह विप्लव,
आजादी हित वीरों का।
रानी झाँसी नाना साहब,
ताँत्या से रण धीरों का।
तब से आजादी मिलने तक,
संघर्ष रहा बस जारी था।
वीर हमारे नित मरते थे।
दर्द गुलामी भारी था।
जलियाँवाला बाग बताता,
नर संहार कहानी को।
भगतसिंह की फाँसी कहती,
इंकलाब की वानी को।
शेखर बिस्मिल ऊधम जैसे,
थे कितने ही बलिदानी।
कितने जेलों में दम तोड़े,
कितने पहुँचे काला पानी।
बोस सुभाष व तिलक गोखले,
कितने नाम गिनाऊँ मैं।
अंग्रेजों के अनाचार के
कैसे किस्से गाऊँ मैं।
गाँधी की आँधी से गोरे
आँख किरकिरी आई थी।
विश्वयुद्ध से सबक मिला था,
कुछ नरमी तब आई थी।
आजादी हित डटे रहे वे,
देशभक्त सेनानी थे।
क्रांति बीज से फसल उगाते,
मातृभूमि अरमानी थे।
आखिर मे दो टुकड़े होकर,
मिली वतन को आजादी।
हिन्दू मुस्लिम दंगे होकर,
खूब हुई थी बरबादी।
संविधान परिषद ने मिलकर,
नया विधान बनाया था।
छबीस जनवरी सन पचास,
यह लागू करवाया था।
बना वतन गणतंत्र हमारा।
खुशियाँ मय त्यौहार मने।
राष्ट्रपति व संसद को अपने,
मतदाता हर बार चुने।
आज विश्व मे चमके भारत,
ध्रुवतारे सा बन स्वतंत्र।
करूँ वंदना जन गण मन की,
अमर सदा रहे गणतंत्र।
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✍✍©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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