वक्त
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~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
. 🌝 *वक्त* 🌝
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समय सतत चलता है साथी,
समय नहीं मिलना है ,ढ़िठाई।
वक्त सगा नहीं रहा किसी का,
वन वन भटके थे रघुराई।
फुरसत के क्षण ढूँढ करें हम
कविता के संग प्रीत मिताई।
समय चक्र है ईष्ट सत्यता,
वक्त सिकंदर,वक्त कल्पना।
वक्त धार संग बहना साथी,
मत देखे यूँ झूठा सपना।
फुरसत मे ,पर्वत कर राई।
कविता के संग प्रीत मिताई।
वक्त कहीं जाया मत करना,
कीमत है अनमोल सखे।
धार वक्त की तेज समझना,
कदम वक्त के साथ रखें।
फुरसत में जागे तरुणाई,
कविता के संग प्रीत मिताई।
वक्त है देश विकास करेगा
मातृभाष सम्मान करें तब।
हिन्दी साहित सृजन साधना,
काव्य मीत हमारे हो तब।
फुरसत में करलें कविताई,
कविता के संग प्रीत मिताई।
वक्त मिले तो सीख व्याकरण,
भाषा सुन्दर हो जाएगी।
छंद मुक्त और छंदबद्ध सब
कविता प्यारी बन गाएगी।
फुरसत में हो बैण सगाई।
कविता के संग प्रीत मिताई।
वक्त ही नौका डूब तराए,
वक्त नदी है वक्त समंदर।
वक्त बने तो क्या से क्या हो,
मानव बना कभी था बंदर।
फुरसत हो तो सोचो भाई,
कविता के संग प्रीत मिताई।
वक्त क्षमा नहीं करे किसी को,
कृष्ण,पाण्डव सब बलशाली।
वक्त मार जब हुई सुदामा,
हमने जानी सब बदहाली।
फुरसत मरे मिलेगी भाई,
कविता के संग प्रीत मिताई।
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✍✍©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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