माँ के आँचल में सो जाऊँ

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
"""""""""""""""""""बाबूलालशर्मा
.         (१६ मात्रिक)
*माँ* के आँचल मे सो जाऊँ
.        ....👀🌹👀....

आज नहीं है, मन पढ़ने का,
नहीं गीत मानस,लिखने का।
मन विद्रोही, निर्मम  दुनिया,
मन की पीड़ा, किसे बताऊँ,
माँ के आँचल में, सो जाऊँ।
🌼
मन में यूँ  तूफान  मचलते,
घट मे सागर भरे छलकते।
तन के छाले घाव बने अब,
उन घावों को ही सहलाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
🌼
तन छीजे, मन उकता जाता,
याद करें,  मंगल खो जाता।
तनकी मनसे,तान मिले बिन
कैसे  स्वर, संगीत  सजाऊँ,
माँ के आँचल में, सो जाऊँ।
🌼
जय जवान के नारे सुनता,
सेना के पग बंधन सुनता।
शासन लचर  बढ़े आतंकी,
कैसे  अब नव गीत बनाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
🌼
जयकिसान भोजनदाता है,
धान कमाए, गम खाता है।
आजीवन जो कर्ज चुकाये,
उनके कैसे  फर्ज  निभाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
🌼
गंगा, गैया,  धरा  व   नारी,
जननी के प्रति रुप हमारी।
रोज विचित्र कहानी सुनता,
कैसे अब  सम्मान  बचाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
🌼
जाति धर्म  में बँटता मानव,
मत के खातिर नेता दानव।
दीन  गरीबी  बढ़ती  जाती,
कैसे  किसको धीर बँधाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
🌼
रिश्तों के अनुबंध उलझते,
मन के सब पैबन्द उघड़ते।
नेह स्नेह की रीत नहीं अब,
प्रीत लिखूँ तो किसे सुनाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
🌼
संसकार  मरयादा  वाली,
नेह स्नेह की झोली खाली।
मातृशक्ति अपमान सहे तो,
माँ का प्यार कहाँ से लाऊँ,
माँ के आँचल में सो जाऊँ।
.       ....👀🌹👀.....
✍©
बाबू ला शर्मा "बौहरा"
सिकन्दरा  303326
दौसा, राजस्थान 9782924479
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
""""""""""""""""""""""""""""""

Comments

Popular posts from this blog

दोहा छंद विधान

गगनांगना छंद विधान

सुख,सुखी सवैया