शिव महिमा
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~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
२१×१५+दीर्घ=३१वर्ण=कलाधर छंद,में चार चरण समतुकांत होते है
🌞 *कलाधर छंद* 🌞
. 🌼 *शिव महिमा* 🌼
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शैल पे विराजते हिमाचली शिला प्रभो,
महेश संग पार्वती गणेश विघ्न टाल के।
भूतिया भभूत अंग वस्त्र बाघ चाम हैे,
रहे त्रिशूल हाथ शंख कंठ हार ब्याल के।
काल रात्रि मान पूजते सभी समादरे,
सुरेश संग में दिनेश देव भू पताल के।
विल्व पत्र भोग दूध नीर घी दही चढ़ा,
भजे सभी सुकाल चाह मेट काल जाल के।
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गंग की तरंग शीश चंद्र की छटा बने,
जटा विशाल नाग संग नंग भूत के रमें।
सिंह पे सवार साथ नादिया गणेश भी,
महेश संग शैल ही विराजि मात हे रमें।
रोग नाश योग देय, भोग शोक नाशनी,
निवार पाप शाप को,अजान हूँ करें क्षमें।
ज्ञान दे सुकाल के विकासमान काम दे,
सँवार भाग्य योग क्षेम,शील भाव दें हमें।
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✍✍🙏©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान
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