चाह शहादत मानस भारत
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~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
. *किरीट सवैया-विधान*
२११×८ भगण× ८
२४ वर्ण, १२,१२ पर यति
चार पद समतुकांत
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*चाह शहादत मानस भारत*
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भारत देश महान बने सब,
लोग निरोग रहे जन भावन।
मेल मिलाप रहे सब धर्मन,
जाति सबै मिल देश बनावन।
सीम सुरक्ष करे बल सैनिक,
शत्रु बिसात पड़े कस आवन।
*लाल* हमार स्वदेश हिते सब,
मानव मानस मान मनावन।
रीत सु प्रीत निभे अपनी बस,
चाह शहादत मानस भारत।
आन निभे अरमान निभे सब,
देश हितैष निछावर चाहत।
आज यही बस है मन मे अब,
काज करूँ मन मानुष राहत।
मानवता हित जीवन अर्पण,
दूर सभी कर भारत आरत।
शान तिरंग सँभाल सकूँ बस,
मान स्वदेश सदा अपना पन।
जन्म मिले फिर भारत मानुष,
तो बलिदान करूँ अपना तन।
जीवन ज्योति चले मन में बस,
याद शहीद यही जपना मन।
देश समाज सुकाज करूँ नित,
भाव रचूँ कविता मन भावन।
साहित साधन साज सरे सब,
शान सुराज सुरक्षण भारत।
गीत लिखूँ ममता समता जब,
मीत सुरीत समाज निभावत।
भाव स्वभाव भरे तन भीतर,
मानव मानस प्रीत कहावत।
संकट हो जब देश धरा पर,
मानस चाहत *लाल* शहादत।
पास पडौ़स छिपे कुछ दानव,
काज करे नित मान अपावन।
मानवता पर भार कलंकित,
केवल ये धन लोभ लुभावन।
दीन जिहाद विधर्म सने मन,
चाहत है बस स्वर्ण कमावन।
द्वेष भरे यह काम करे बस,
मानव मानस *लाल* सतावन।
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✍©
बाबू लाल शर्मा "बौहरा"
सिकन्दरा, 303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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