विज्ञ रचित ११ घनाक्षरी
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~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
. *विविध - घनाक्षरी छंद विधान*
_११ प्रकार की घनाक्षरी छंद संरचना_
१. मनहरण घनाक्षरी
विधान:-- ८, ८, ८, ७ वर्ण
आठ,आठ, आठ,सात वर्ण
संयुक्त वर्ण एक ही माना जाता है।
कुल ३१वर्ण, १६, १५, पर यति हो,( , )
पदांत गुरु(२) अनिवार्य है,
चार पद सम तुकांत हो,
चार पदों का एक छंद कहलाता है।
. *होली*
रूप रंग वेष भूषा,
भिन्न राज्य और भाषा,
देश हित वीर वर,
बोल भिन्न बोलियाँ।
सीमा पर रंग सजे,
युद्ध जैसे शंख बजे,
ढूँढ ढूँढ दुष्ट मारे,
सैनिको की टोलियाँ।
भारतीय जन वीर,
धारते है खूब धीर,
मारते है शत्रुओं को ,
झेलते हैं गोलियाँ।
फाग गीत मय चंग
खेलते हैं सब रंग
देश हित खेलते हैं,
खून से भी होलियाँ।
. 👀👀
✍© बाबू लाल शर्मा °बौहरा" विज्ञ
२. जनहरण घनाक्षरी
विधान:-- ३१, वर्ण प्रति चरण
( ८८८७) १६,१५ पर यति
चार चरण समतुकांत हो।
प्रति चरण ३० वर्ण लघु और
अंतिम वर्ण गुरु हो।
. __प्रभु नटखट__
चल पथ पनघट
निरखत जल घट
गिरधर नटखट
पटकत घट है।
भय भगदड़ तब
घर पथ लगि जब
छिपत रहत अब
गिरधर नट है
वन पथ छिप कर
दधि घट क्षत कर
झट पट चट कर
भग सरपट है।
सर तट तरु चढि
लखत लपक बढ़ि
वसन रखत दृढ़
प्रभु नटखट है।
. ++++++
©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
३. जलहरण घनाक्षरी
विधान :-- ३२ वर्ण प्रति चरण
( ८८८८) १६,१६ पर यति
चार चरण समतुकांत
चरणांत लघु गुरु, या लघु लघु
. __नीर बहे__
मेघ घटा जल वर्षा
खेत खेत है सरसा
बाग पेड़ सर हर्षा
रोक जन नीर बहे।
नीर भावि जन शक्ति
उठो धीर मति व्यक्ति
वारि से हो अनुरक्ति
व्यर्थ यह नीर बहे।
जल कुंड बना घर
रख मेड़ बनाकर
कूप बापी बेरे भर
चेत नर नीर बहे।
उठ सब घर वाले
लख छत परनाले
जलहित नल डालें
सोच मत नीर बहे।
. ++++++
©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
४. रूप घनाक्षरी
विधान:- ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण
१६,१६ वर्ण पर यति
चार चरण समतुकांत
चरणांत गुरु लघु (गाल)
__भारती वंदन__
मात भारती वंदन
माटी तेरी है चंदन,
जन्मे जो रघुनंदन
आँचल में भगवान।
मान देश का रखते
शान तिरंगा रखते,
प्राण देह दे सकते
सपने शुभ अरमान।
लिखते छंद ज्ञान के
देश धरा ईमान के,
सत्ता देश विधान के
गाते जन गुणगान।
अरि को नष्ट करेंगें
सब आतंक मिटेंगे,
रंग सुरंग भरेंगे
बढ़े सदा तव शान।
. +++++
©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
५. मदन घनाक्षरी
विधान :- ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण
१६,१६ वर्ण पर यति
चार चरण समतुकांत
चलणांत २२ गुरु गुरु
__नीर जरूर बचाएँ__
वर्षा का नीर सहेजें
संदेश सभी को भेजें,
पुनर्भरण कर लो
व्यर्थ न नीर बहाएँ।
पेड़ लगाओ सब ही
मेड़ बनाओ तब ही,
खेत खेत जल कुंडे
घर भी कुंड बनाएँ।
कूप बावड़ी पोखर
भरे नीर वर्षा पर,
हर पथ कुण्ड बना,
बूंद बूंद जल लाएँ।
बाग बगीची घर की
अपनी हो या पर की,
वर्षा जल कुण्ड बना
नीर जरूर बचाएँ।
. +++++
©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
६ . डमरू घनाक्षरी
विधान :- ३२ वर्ण(८८८८) प्रतिचरण
१६,१६,वर्ण पर यति
चार चरण समतुकांत
समस्त वर्ण मात्रा विहीन हो
. __हँसत नट__
चल पथ पनघट
खटकत जल घट,
धर पद नटखट
भग पटकत घट।
भय भगदड़ तब
घर पथ लग जब,
कहत रहत अब
अभय हँसत नट।
वन पथ तक कर
छछ घट क्षत कर,
झट पट चट कर
तब भग सरपट।
सर तट तरु चढ
लखत लपक बढ़,
वसन रखत दृढ़
इत उत नटखट।
. ++++++
©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
७ . कृपाण घनाक्षरी
विधान : - ३२ वर्ण(८८८८) प्रतिचरण
चार चरण समतुकांत
८,८,८,८ पर यति हो, एवं
चारो यति समतुकांत अनिवार्य
चरणांत गुरु लघु २१ (गाल)
. __वर्षा नीर__
माने जाने भू की पीर,
साथी सारे हैं जो धीर,
गायें पौधे कागा कीर,
रक्षे भैया वर्षा नीर।
ले कुदाली आओ बीर,
चेतो पानी रक्षा गीर,
वर्षा पानी औ समीर,
गो बचालें वर्षा नीर।
ध्यानी मानी हैं बे पीर,
पानी है तो है अमीर,
होली रंगोली अबीर,
रक्षें साथी वर्षा नीर।
बापी टाँके नदी तीर,
राखो तो साफ सुधीर,
दोहे गाए थे कबीर,
आओ रक्षे वर्षा नीर।
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©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
८. विजया घनाक्षरी
विधान :- ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण
चार चरण समतुकांत
आंतरिक समान्तता हो
चरणांत नगण १११
__तिरंगा चाह कफन__
भारत माता वंदन
माटी सादर चंदन,
मानस अभिनंदन
चरणों में है नमन।
जन गण का गायन
हर दिन हो सावन,
कण कण है पावन
रहे आजाद वतन।
सुन्दर सुन्दर वन
पौरुष वान बदन,
ईमानी है जन जन
रहे आबाद चमन।
देश की रक्षा का मन
करें आतंक हनन,
समर्पित दैही धन
तिरंगा चाह कफन।
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©~~~~~~~~ बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
९ . हरिहरण घनाक्षरी
विधान :-- ३२ वर्ण( ८८८८) प्रतिचरण
चार चरण समतुकांत
आंतरिक समान्तता अपेक्षित
चरणांत लघु लघु ११
. __परिवर्तन__
हे श्याम वर्ण के घन
नर्मद सा हो ये मन,
पत्थर शिव जीवन
वसुधा पर सावन।
सागर जैसा हो धन
विहगों जैसा जीवन,
यमुना सी बंशी धुन
गंगा सा जल पावन।
हे राधा तेरा नर्तन,
मेघों के जैसा गर्जन,
हो युग परिवर्तन
माधव मन भावन।
मीरा के पद गायन,
भारत माता के जन,
पायलियों का वादन,
छंद विज्ञ के गावन,
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©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
१० . देव घनाक्षरी
विधान:- ३३वर्ण (८८८९) प्रतिचरण
चार चरण समतुकांत
चरणांत नगण१११(पुनरावृत्ति)
(जैसे कदम कदम)
__कदम-कदम__
लड़ें सीमा पर हम,
पातकी जाएगा थम,
कारवाँ चले बढ़ेगा,
चलना कदम-कदम।
पाक पड़ौसी बे दम,
सुधारो उसको तुम,
करना नहीं रहम,
वह तो छदम छदम।
चीन भाई धोखे सम,
फैलता है काला तम,
भारती माता पावन,
झूठ वो सनम सनम।
शत्रु हो कोई आधम,
नष्ट होगा हर बम,
सबक देना ही होगा
तोड़ना वहम वहम।
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©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
११. सूर घनाक्षरी
विधान:-- ३० वर्ण(८८८६) प्रतिचरण
चार चरण समतुकांत
चरणांत की कोई शर्त नहीं है।
. __जल रक्षण__
मनुज भूल नादानी,
आज समय की मानी,
बचत वर्षा का पानी
सोचो कुण्ड बने।
नही बहा ये अमृत
बचा नीर से प्राकृत,
धरा हेतु है सुकृत
टांके कुण्ड बने।
ताल तलैया बापी
गहराई कब मापी,
रेत खेत तप तापी
कूएँ कुण्ड बनें।
घर हो या दफ्तर हो
ऊँचा हो कमतर हो,
जन मन सभी सुने
पक्के कुण्ड बने।
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©~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*
✍©
बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञ
सिकंदरा, दौसा, राजस्थान
Pin ३०३३२६
Mob.no. ९७८२९२४४७९
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